72825 शिक्षक भर्ती Latest News: 25 फरवरी की सुनवाई क्यों है निर्णायक? Court Update Today

Spread the love

72825 shikshak Bharti Latest News Today

1. Introduction: न्याय की लंबी प्रतीक्षा और उम्मीद की नई किरण

उत्तर प्रदेश की चर्चित 72825 शिक्षक भर्ती और B.Ed TET 2011 के अभ्यर्थियों के लिए संघर्ष का यह दौर अब अपने चरम पर है। यह मामला केवल कानूनी आंकड़ों का नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के एक दशक के धैर्य की परीक्षा है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक काज लिस्ट (Cause List) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 25 फरवरी को दोपहर 1:40 बजे निर्धारित है। यह समय उन सभी अभ्यर्थियों के लिए निर्णायक है जो व्यवस्था की चौखट पर ‘पूर्ण न्याय’ की आस लगाए बैठे हैं। अब उम्मीद और हकीकत के बीच का फासला कम होता दिख रहा है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

2. 25 फरवरी की ‘फाइनल’ तारीख: इस बार क्यों अलग है?

प्रयागराज से लेकर दिल्ली तक, 25 फरवरी की तारीख शिक्षा जगत की सबसे बड़ी “ब्रेकिंग न्यूज़” बन चुकी है। काज लिस्ट में मामले का शामिल होना इस बात की पुष्टि है कि सुनवाई निश्चित रूप से होगी। इस बार की सुनवाई को ‘फाइनल’ इसलिए माना जा रहा है क्योंकि माननीय न्यायालय का रुख अब प्रक्रियात्मक देरी (Procedural Delay) से हटकर सख्त कार्रवाई (Coercive Action) की ओर मुड़ गया है। वर्षों के टाल-मटोल के बाद, कोर्ट अब इस भर्ती प्रक्रिया को अंतिम तार्किक परिणति तक पहुँचाने के प्रति गंभीर है।

3. अधिकारियों की उपस्थिति: कोर्ट का कड़ा रुख

इस बार की सुनवाई की सबसे महत्वपूर्ण बात अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही है। सुप्रीम कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव और संबंधित उच्चाधिकारियों को सशरीर उपस्थित रहने का कड़ा निर्देश दिया है। पिछली सुनवाइयों में अधिकारियों की आधिकारिक उपस्थिति दर्ज न होने पर कोर्ट ने अपनी नाराजगी साफ जाहिर की थी। विभाग की जवाबदेही तय करने के लिए कोर्ट ने स्पष्ट रुख अपनाया है:

“बिना अधिकारी के उपस्थित हुए आगे की सुनवाई नहीं होगी।”

यह विधिक बाध्यता (Legal Obligation) दर्शाती है कि कोर्ट अब कागजी दलीलों के बजाय सीधे जिम्मेदार अफसरों से समाधान चाहता है।

4. Article 142: सुप्रीम कोर्ट की ‘असीमित’ ताकत

72825 शिक्षक भर्ती के मामले में ‘अनुच्छेद 142’ (Article 142) सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। भारतीय संविधान का यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को ‘पूर्ण न्याय’ (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए विशेष और असीमित शक्तियाँ प्रदान करता है। इसके माध्यम से न्यायालय किसी भी तकनीकी नियम, रिक्तियों की कमी या प्रशासनिक बाधाओं को दरकिनार करते हुए ऐसा ऐतिहासिक आदेश दे सकता है, जिसे मानना राज्य सरकार के लिए अनिवार्य होगा। याचियों के लिए यह सबसे बड़ी उम्मीद है क्योंकि समानता के अधिकार (Principle of Equality) की रक्षा के लिए कोर्ट इसी शक्ति का प्रयोग कर सकता है।

5. डेटा का पेंच: Google Form बनाम विभागीय पोर्टल

डेटा के मिलान को लेकर अब तक जो भ्रम था, वह इस सुनवाई में साफ हो सकता है। Google Forms के जरिए जुटाए गए डेटा में “सॉफ्टवेयर फिल्टर” न होने के कारण आंकड़ों में काफी विसंगतियां थीं। हालांकि, विभागीय पक्ष की वास्तविकता यह है कि 16478 की सूची पहले ही बन चुकी है। अब मुख्य चुनौती 6170 पदों और उन ‘वैध याचियों’ (Valid Petitioners) की सटीक पहचान करना है जो 2017 से पहले से इस कानूनी लड़ाई का हिस्सा रहे हैं। कोर्ट विभागीय पोर्टल के ‘फिल्टर्ड’ डेटा पर ही भरोसा करेगा, जो वास्तविक हकदारों की तस्वीर साफ करेगा।

6. 839 केस का उदाहरण: समानता का अधिकार

इस पूरे प्रकरण में “839 अभ्यर्थियों वाला मामला” एक अटूट नजीर (Precedent) बन गया है। अभ्यर्थियों का तर्क विधिक रूप से बहुत ठोस है—जब इसी भर्ती के तहत 839 लोगों को कम अंकों के बावजूद नियुक्ति और पूर्ण वेतन मिल रहा है, तो बाकी योग्य याचियों को उसी लाभ से वंचित क्यों रखा गया?

वर्तमान में जस्टिस करोल इस मामले को देख रहे हैं और वे “जस्टिस दीपक मिश्रा काल” के अंतरिम आदेशों की निरंतरता में इस केस का अध्ययन कर रहे हैं। मामले की विधिक सरलता पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस करोल ने स्पष्ट कहा है:

“It is very simple.”

उनका संकेत स्पष्ट है कि यह मामला उतना जटिल नहीं है जितना इसे दिखाया जा रहा है। यदि समानता के सिद्धांत का पालन हो, तो न्याय का मार्ग बिल्कुल सीधा है।

7. क्या हो सकते हैं 25 फरवरी के संभावित परिणाम?

आगामी सुनवाई के दौरान निम्नलिखित प्रमुख विधिक परिणाम सामने आने की प्रबल संभावना है:

  • अधिकारियों की सीधी जवाबदेही: उपस्थित सचिव को भर्ती की विसंगतियों पर मौके पर ही स्पष्टीकरण देना होगा।
  • वैध याचियों की पहचान: पोर्टल के डेटा के आधार पर वास्तविक याचियों की संख्या पर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
  • रोजगार संरचना का प्रस्ताव: कोर्ट सरकार से योग्य अभ्यर्थियों के समायोजन या भविष्य की नियुक्ति प्रक्रिया पर ठोस ब्लूप्रिंट मांग सकता है।
  • जिलावार रिक्तियों की रिपोर्ट: राज्य भर के जिलों से वर्तमान रिक्त पदों का विस्तृत ब्योरा तलब किया जा सकता है।

8. Conclusion: भविष्य की ओर एक कदम

25 फरवरी की सुनवाई केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि एक दशक लंबे संघर्ष का परिणाम हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अनुच्छेद 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ का तराजू अंततः 2011 के उन अभ्यर्थियों के पक्ष में झुकेगा जिन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। क्या सुप्रीम कोर्ट समानता के अधिकार को सर्वोपरि रखते हुए इस भर्ती के अंतहीन इंतजार को समाप्त करेगा? इन सभी यक्ष प्रश्नों के उत्तर 25 फरवरी को दोपहर 1:40 बजे से मिलने शुरू होंगे।


Spread the love

Leave a Comment