UP Teacher Transfer में बड़ा ट्विस्ट! ऑफलाइन लिस्ट कब जारी होगी, शिक्षकों का धरना खत्म लेकिन इंतजार जारी?

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UP Teacher Transfer में बड़ा ट्विस्ट! ऑफलाइन लिस्ट कब जारी होगी, शिक्षकों का धरना खत्म लेकिन इंतजार जारी?,उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापकों और प्रधानाचार्यों के ट्रांसफर की प्रक्रिया इस साल सुर्खियों में बनी हुई है। मूल रूप से 30 जून 2025 तक ये ट्रांसफर होने थे, लेकिन अभी तक ऑफलाइन लिस्ट जारी नहीं हुई। शिक्षक लगातार धरने दे रहे हैं, सरकार आश्वासन पर आश्वासन देती जा रही है। कभी 5 तारीख, कभी 10, कभी 15… अब सूत्रों के मुताबिक 20 अगस्त 2025 तक लिस्ट आने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन क्या इस बार वाकई ट्रांसफर हो पाएंगे? आइए जानते हैं पूरी कहानी।

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शिक्षकों की परेशानी समझिए।

उत्तर प्रदेश में हजारों अध्यापक और प्रधानाचार्य ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं। वे परिवार से दूर हैं, कुछ स्वास्थ्य कारणों से, कुछ पारिवारिक वजहों से घर के करीब जाना चाहते हैं। लेकिन देरी ने सबको परेशान कर रखा है। हाल ही में, 11 अगस्त को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) ने धरना दिया था। निदेशालय के बाहर सैकड़ों शिक्षक जमा हुए, नारे लगाए। उनका कहना था कि ऑफलाइन फाइलें तैयार हैं, लेकिन लिस्ट क्यों नहीं आ रही? मंत्री के आश्वासन पर 15 अगस्त के आसपास धरना खत्म हुआ, लेकिन अभी तक कोई ठोस अपडेट नहीं। सरकार ने कहा है कि जून में एनओसी लेने वालों को शामिल किया जाएगा। लेकिन शिक्षक पूछ रहे हैं – कब?

इस साल कुछ नया हुआ है। जून में पहली बार 360 अध्यापकों के ट्रांसफर ऑनलाइन हुए। ये सफल रहे, लेकिन सिर्फ ऑनलाइन आवेदकों के लिए। ऑफलाइन वाले अब भी लटके हैं। सरकार का दावा है कि अगले साल 2026-27 से सभी ट्रांसफर सिर्फ ऑनलाइन होंगे। कोई ऑफलाइन नहीं। ये कदम पारदर्शिता बढ़ाने के लिए है, लेकिन इस साल की देरी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। जुलाई में मंत्री के विदेश दौरे के बाद प्रक्रिया शुरू होने की बात थी, लेकिन अगस्त आधा बीत गया, अभी भी इंतजार। अमर उजाला जैसी रिपोर्ट्स में बताया गया है कि 1500 से ज्यादा फाइलें निदेशालय में पड़ी हैं। शिक्षक संघों का कहना है कि अगर 20 अगस्त तक लिस्ट नहीं आई, तो फिर धरना होगा।

अब बात उत्तर प्रदेश के एडेड माध्यमिक विद्यालयों में ट्रांसफर प्रक्रिया की। ये प्रक्रिया वाकई जटिल है। यहां हर स्टेप पर दौड़-भाग लगती है। शिक्षक बताते हैं कि ऑफलाइन ट्रांसफर में पैसों की बात आम है, हालांकि कोई खुलकर नहीं बोलता। एक ट्रांसफर में 7-8 लाख रुपये तक खर्च होने की अफवाहें हैं। सरकार ये जानती है, लेकिन अब तक ऑफलाइन सिस्टम चल रहा है। सिर्फ दो बार ऑनलाइन ट्रांसफर हुए हैं। अगली बार से ऑनलाइन ही होंगे, ये वादा है। लेकिन क्या ये भ्रष्टाचार खत्म करेगा? शिक्षक उम्मीद कर रहे हैं।

ऑफलाइन प्रक्रिया को समझिए।

अगर आपको ट्रांसफर चाहिए, तो सबसे पहले टारगेट स्कूल के प्रबंधक से मिलना पड़ता है। अनुमति के नाम पर 2-4 लाख रुपये मांगे जाते हैं, ये आम शिकायत है। फिर 7-8 फाइलें बनानी पड़ती हैं। मौजूदा स्कूल के प्रबंधक से एनओसी, वहां भी 2-4 लाख। फिर DIOS (जिला विद्यालय निरीक्षक) ऑफिस। बाबू 40-50 हजार लेते हैं, तब फाइल आगे। JD (संयुक्त शिक्षा निदेशक) ऑफिस में फिर वही, 40-50 हजार। फाइल घूम-घूमकर वापस JD, फिर प्रयागराज शिक्षा निदेशालय। यहां 1-1.5 लाख तक की बात होती है। ये सब आरोप हैं, लेकिन शिक्षक चुप रहते हैं, क्योंकि बोलने से ट्रांसफर रुक सकता है। हाल की खबरों में भी देरी का जिक्र है, लेकिन भ्रष्टाचार पर सीधा कुछ नहीं। हिंदुस्तान टाइम्स और जगरण जैसी रिपोर्ट्स में का जिक्र है, जहां शिक्षक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

सरकार की तरफ से क्या हो रहा है?

जून में ट्रांसफर पॉलिसी आई, जहां surplus और vacancy को बैलेंस करने की बात थी। 5378 बेसिक शिक्षकों के ट्रांसफर हाल ही में हुए, लेकिन वो प्राइमरी लेवल के हैं। माध्यमिक के लिए अभी इंतजार। अपर शिक्षा निदेशक ने सभी DIOS को निर्देश दिए हैं कि फाइलें जल्द प्रोसेस करें। लेकिन 17 अगस्त तक कोई नई लिस्ट नहीं आई। सूत्र कहते हैं, 20 अगस्त तक हो सकता है। अगर नहीं, तो शिक्षक फिर सड़क पर।

ये देरी सिर्फ प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक भी लगती है। शिक्षक वोट बैंक हैं, चुनाव करीब हैं। सरकार नहीं चाहती असंतोष फैले। लेकिन शिक्षक कहते हैं – परिवार टूट रहे हैं, बच्चे दूर हैं, स्वास्थ्य खराब हो रहा है। एक शिक्षक ने बताया, “हम धरने पर बैठे, लेकिन घर कैसे चलाएं?” संघों ने चेतावनी दी है कि अगर 20 तक लिस्ट नहीं, तो बड़ा आंदोलन।


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