
विवरण: उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत रिक्त स्कूल भवनों में आंगनवाड़ी केंद्रों को शिफ्ट करने की योजना शुरू की है। इससे 3-6 वर्ष के बच्चों को बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। जानिए इस पहल के बारे में विस्तार से!
न्यूज़:
उत्तर प्रदेश सरकार ने बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्कूलों के पेयरिंग (Pairing) के कारण रिक्त पड़े स्कूल भवनों में आंगनवाड़ी केंद्रों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शाला पूर्व शिक्षा को बढ़ावा देने और 3-6 वर्ष के बच्चों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है।
प्रदेश के 75 जनपदों में कुल 10,827 रिक्त स्कूल भवनों को ‘बाल वाटिका’ के रूप में उपयोग किया जाएगा। इन भवनों में आंगनवाड़ी केंद्रों को शिफ्ट करने के लिए जनपद स्तर पर सर्वेक्षण और मैपिंग की प्रक्रिया होगी। इसका उद्देश्य बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना है।
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योजना का कार्यान्वयन:
इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
| कार्य | निर्धारित अवधि |
|---|---|
| रिक्त भवनों का सर्वेक्षण और वर्गीकरण (कोलीकेटेड, उपयुक्त, अनुपयुक्त) | 15 दिन |
| संबंधित हितधारकों (प्रधान, आंगनवाड़ी कार्यकत्री, अभिभावक) के साथ बैठक | 15 दिन |
| शिफ्टिंग योग्य भवनों का चिन्हांकन और साज-सज्जा | 15 दिन |
| उपयुक्त भवनों में आंगनवाड़ी केंद्रों की शिफ्टिंग | 15 दिन |
सर्वेक्षण और शिफ्टिंग की प्रक्रिया:
- जिलास्तरीय समिति का गठन: मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित होगी, जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (सदस्य सचिव), जिला कार्यक्रम अधिकारी, संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी और बाल विकास परियोजना अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति जिलाधिकारी के अनुमोदन से सर्वेक्षण और शिफ्टिंग की प्रक्रिया को लागू करेगी।
- सर्वेक्षण: विकास खंड स्तर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी संयुक्त रूप से सर्वेक्षण करेंगे। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रिक्त भवनों में आधारभूत सुविधाएं जैसे पेयजल, शौचालय और प्ले एरिया उपलब्ध हों।
- शिफ्टिंग के मानदंड:
- केवल 500 मीटर या उससे कम दूरी पर स्थित आंगनवाड़ी केंद्रों को शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा।
- भवन की स्थिति संतोषजनक और बच्चों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त होनी चाहिए।
- यदि मौजूदा आंगनवाड़ी केंद्र में सभी सुविधाएं (पेयजल, शौचालय, विद्युतीकरण, प्ले एरिया) उपलब्ध हैं और भवन की स्थिति अच्छी है, तो उसे शिफ्ट नहीं किया जाएगा।
- मैपिंग: सर्वेक्षण के आधार पर उपयुक्त और अनुपयुक्त भवनों की मैपिंग होगी, और बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
समिति का गठन:
जनपद स्तर पर गठित समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे:
| पद | भूमिका |
|---|---|
| मुख्य विकास अधिकारी | अध्यक्ष |
| जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी | सदस्य सचिव |
| जिला कार्यक्रम अधिकारी | सदस्य |
| संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी | सदस्य |
| संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी | सदस्य |
इस पहल का महत्व:
यह योजना बच्चों को बेहतर शैक्षिक और पोषण सुविधाएं प्रदान करने में मदद करेगी। रिक्त स्कूल भवनों का उपयोग न केवल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेगा, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण भी प्रदान करेगा। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ):
1. आंगनवाड़ी केंद्रों को शिफ्ट करने का उद्देश्य क्या है?
3-6 वर्ष के बच्चों को बेहतर शाला पूर्व शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना।
2. कौन से आंगनवाड़ी केंद्र शिफ्ट किए जाएंगे?
500 मीटर या उससे कम दूरी पर स्थित और उपयुक्त भवनों में शिफ्टिंग की जाएगी। सुविधायुक्त केंद्रों को शिफ्ट नहीं किया जाएगा।
3. सर्वेक्षण और शिफ्टिंग की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी?
प्रत्येक चरण के लिए 15 दिन का समय निर्धारित है, यानी कुल प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी होगी।
4. क्या यह योजना सभी जनपदों में लागू होगी?
हां, यह योजना उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में लागू होगी, जहां 10,827 रिक्त स्कूल भवनों की मैपिंग की जाएगी।
5. भवनों का चयन कैसे होगा?
भवनों का चयन उनकी स्थिति, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं (पेयजल, शौचालय, प्ले एरिया) की उपलब्धता के आधार पर होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह जानकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 12 जुलाई, 2025 को जारी पत्र पर आधारित है। इस न्यूज़ लेख में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे आधिकारिक दस्तावेज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी कार्यवाही से पहले संबंधित विभाग से आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रिक्त स्कूल भवनों का उपयोग कर आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण मिलेगा। यह योजना संसाधनों का बेहतर उपयोग करेगी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को साकार करेगी।
स्रोत: बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, पत्र दिनांक 12 जुलाई, 2025

लेखक परिचय – चंद्रशेखर
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चंद्रशेखर
(M.Sc Maths, B. Sc, B.Ed, TGT Qualified 2016, UPTET Qualified)