UP Sitapur Viral Video 2025 | हेडमास्टर Vs BSA बेल्ट कांड की पूरी सच्चाई 23 सितंबर 2025 की शाम को उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के बीएसए कार्यालय से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल होता है। यह वीडियो सीसीटीवी कैमरे का था, जिसकी लंबाई लगभग 30 सेकंड थी। वीडियो में दिखता है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अखिलेश प्रताप सिंह अपनी कुर्सी पर बैठे हैं। उनके सामने एक शिक्षक खड़े हैं और बगल में एक कर्मचारी मौजूद है। बीएसए और शिक्षक के बीच बातचीत चल रही है। बातचीत के दौरान बीएसए अचानक हाथ झटकते हैं, कर्मचारी की ओर देखते हैं और इशारा करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो उन्होंने कोई गाली दी हो या शिक्षक के बारे में कुछ विशेष टिप्पणी की हो।
इस पर शिक्षक को गुस्सा आ जाता है। उनके हाथ में एक फाइल थी जिसे उन्होंने ज़ोर से बीएसए के सामने पटक दिया। फिर पीछे हटते हुए बेल्ट निकाल ली। बेल्ट को लोहे के कुंदे वाली तरफ से पकड़कर उन्होंने 6 सेकंड के अंदर पांच बार बीएसए पर प्रहार कर दिया। इसी दौरान ऑफिस में शोरगुल मचने लगा। सीसीटीवी में आवाज़ रिकॉर्ड नहीं हुई थी, लेकिन अंदाजा लगाया गया कि शिक्षक ने नाराज़गी में ऐसा किया। थोड़ी ही देर में अन्य कर्मचारी (करीब 8–10 लोग) वहां पहुंचते हैं। इसके बाद का दृश्य वायरल नहीं हुआ। बताया गया कि पुलिस ने मौके पर शिक्षक को पकड़ा, कोतवाली ले जाया गया और वहां उनसे मारपीट भी हुई, जिससे उनका चेहरा और शरीर पर सूजन व चोट के निशान दिखाई दिए।
अब सवाल यह था कि आखिरकार इस बेल्टबाज़ी की वजह क्या थी?
यह घटना जुड़ी थी महमूदाबाद विकास क्षेत्र के नदवा गांव के प्राथमिक विद्यालय से। वहां के हेडमास्टर बृजेंद्र कुमार वर्मा ने अपनी सहायक अध्यापिका अवंतिका गुप्ता को एक नोटिस जारी किया था। नोटिस में उनसे परीक्षाओं व उड़न दस्ते की ड्यूटी और 21 अगस्त से 20 सितंबर तक की उपस्थिति से जुड़े प्रमाण पत्र मांगे गए थे। यह नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे शिक्षिका ने इसे अपनी बेइज्जती माना और शिकायत बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह तक पहुँची।
इसी दौरान एक और मामला था—फूलचंद सिंह नामक व्यक्ति ने विद्यालय की वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की थी। आरटीई अधिनियम 2009 के तहत 3 साल का वित्तीय ब्यौरा मांगा गया था जिसे हेडमास्टर ने उपलब्ध करा दिया। इसके बाद 10 साल का ब्यौरा भी मांगा गया और वह भी उपलब्ध करा दिया गया। इस बीच हेडमास्टर पर आरोप लगने लगे कि वह अवंतिका गुप्ता का प्रबंधन करने को तैयार नहीं हैं।
कुछ ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। उनमें बीएसए और हेडमास्टर की बातचीत सुनाई देती है। एक ऑडियो में अधिकारी कहते हैं कि अवंतिका गुप्ता की मेडिकल कंडीशन है, इसलिए उन्हें कुछ दिन विद्यालय आने से रोका जाए। हेडमास्टर कहते हैं कि गांव वाले शिकायत करते हैं कि मैडम नहीं आतीं, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बीएसए जवाब देते हैं कि गांव की चिंता मत कीजिए, आप वही कहिए जो हम कहते हैं। दूसरा ऑडियो भी इसी तरह था, जिसमें बीएसए ने हेडमास्टर पर दबाव डाला कि वे रोज़ाना अपनी उपस्थिति की सेल्फी भेजें। हेडमास्टर ने विरोध किया तो बीएसए ने धमकी दी कि यदि एक साल तक भी एक मिनट की देरी हुई तो निलंबित कर देंगे।
इसी बीच विद्यालय के एक और सहायक शिक्षक संतोष कुमार पर आरोप लगा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर अनुचित पोस्ट साझा की और समय पर विद्यालय नहीं आते। उन्हें निलंबित कर दिया गया। यानी स्थिति यह हुई कि—
- एक शिक्षक (संतोष कुमार) निलंबित,
- एक शिक्षिका (अवंतिका गुप्ता) विद्यालय में उपस्थित नहीं,
- और हेडमास्टर (बृजेंद्र वर्मा) ईमानदारी से काम कर रहे थे, मगर उन्हीं पर दबाव बनाया गया।
शिक्षिका की शिकायत पर 23 सितंबर की शाम हेडमास्टर को बीएसए ऑफिस बुलाया गया और वहीं यह पूरा घटनाक्रम हुआ।
परिवार का आरोप है कि बीएसए ने गाली दी थी, जिससे गुस्से में हेडमास्टर ने बेल्ट से हमला किया। इसके बाद उपस्थित कर्मचारियों ने हेडमास्टर को पकड़कर बुरी तरह पीटा। वीडियो वायरल होते ही पूरे प्रदेश में चर्चा छिड़ गई।
24 सितंबर को विद्यालय बंद रहा। बच्चों ने विरोध प्रदर्शन किया और पढ़ाई नहीं होने दी। 25 सितंबर को क्षेत्रीय विधायक विद्यालय पहुँचीं और ताला तोड़कर नए शिक्षकों की नियुक्ति करवाई। बच्चों का आरोप था कि उनके साथ बदसलूकी की गई, हालांकि विधायक ने इसे निराधार बताया।
26 सितंबर को भी बच्चे विद्यालय नहीं गए। उनका कहना था कि वे केवल अपने गुरुजी (बृजेंद्र वर्मा) से ही पढ़ेंगे। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। मगर न तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और न ही शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कोई बयान आया।
27 सितंबर को डीएम और एसएसपी बच्चों से मिलने फल-चॉकलेट लेकर पहुँचे, ताकि पढ़ाई बाधित न हो। दिलचस्प बात यह रही कि जब अवंतिका गुप्ता महीनों तक विद्यालय नहीं आईं, तब किसी ने पढ़ाई की चिंता नहीं जताई।
बाद में यह भी सामने आया कि 21 अगस्त से 20 सितंबर तक अवंतिका गुप्ता विद्यालय नहीं आईं और उन्हें निलंबित कर दिया गया। मगर सवाल उठने लगा कि वायरल वीडियो का केवल आधा हिस्सा क्यों सामने आया? जिसमें बीएसए को पीटा गया, परंतु शिक्षक को कर्मचारियों द्वारा पीटे जाने का दृश्य क्यों छुपा लिया गया?
शिक्षक संघ और बार एसोसिएशन ने मांग की कि बीएसए के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हो, कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो और निष्पक्ष जांच हो। हेडमास्टर की पत्नी सीमा वर्मा ने भी कहा कि उनके पति से पहले 3 साल का ब्यौरा, फिर 10 साल का ब्यौरा मांगा गया, ताकि उन्हें फँसाया जा सके।
यह मामला आज भी अधूरा है, लेकिन यह तय है कि अखिलेश प्रताप सिंह पर हुई बेल्ट की मार की गूंज लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
इस घटना से शिक्षा जगत हिल गया। एक ओर ईमानदार शिक्षक जेल में, दूसरी ओर प्रशासनिक दबाव में शिक्षिका का पक्ष लिया जाना और बच्चों का अपने गुरुजी के लिए आंदोलन करना—सबने मिलकर इसे राष्ट्रीय बहस बना दिया।
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लेखक परिचय – चंद्रशेखर
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चंद्रशेखर
(M.Sc Maths, B. Sc, B.Ed, TGT Qualified 2016, UPTET Qualified)