UP LT Grade Exam: 110 नंबर पाने वाले भी क्यों हो रहे हैं बाहर? वो 3 कड़वे सच जो आपको जानना जरूरी है
उत्तर प्रदेश LT ग्रेड परीक्षा के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह समय अत्यंत संवेदनशील है। एक वरिष्ठ शिक्षा विश्लेषक के रूप में, मैंने देखा है कि अभ्यर्थी दिन-रात एक कर 150 में से 110 अंक (लगभग 73% से अधिक) जैसे उत्कृष्ट स्कोर तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन फिर भी वे अंतिम चयन सूची से बाहर हो जाते हैं। यह विरोधाभास किसी हृदयविदारक त्रासदी से कम नहीं है। आखिर क्यों बेहतरीन मेधा और कड़े परिश्रम के बावजूद सफलता हाथ से फिसल रही है? आज हम उन ‘3 कड़वे सच’ का विश्लेषण करेंगे जो आपकी वर्षों की तपस्या का भविष्य तय करते हैं।
कड़वा सच 1: 40% का नियम और ‘सेक्शनल कट-ऑफ’ का भ्रम
अभ्यर्थियों के बीच सबसे बड़ा भ्रम सामान्य अध्ययन (GS) और मुख्य विषय में अलग-अलग पास होने को लेकर है। एक रणनीतिकार के रूप में, मैंने पाया है कि इस गलतफहमी के कारण छात्रों का ‘टाइम मैनेजमेंट’ पूरी तरह बिगड़ जाता है। छात्र अक्सर इस डर में रहते हैं कि उन्हें GS में अलग से क्वालिफाई करना होगा, जिसके कारण वे अपने मुख्य विषय की कीमत पर GS पर जरूरत से ज्यादा समय (Cognitive Load) खपा देते हैं।
वास्तविक नियम का विश्लेषण: आयोग की गणना बिल्कुल स्पष्ट है—चयन के लिए आपके ‘नेट स्कोर’ (Net Score) को देखा जाएगा, न कि सेक्शनल परफॉरमेंस को।
- कुल प्रश्न: 150 (30 GS + 120 संबंधित विषय)
- अनिवार्य थ्रेशोल्ड: कुल मिलाकर 40% अंक।
- गणित: 150 प्रश्नों में से आपको कुल 60 प्रश्न सही करने थे। इसमें GS और विषय के लिए अलग-अलग पास होने की कोई बाध्यता नहीं है।
“GS और Subject में अलग-अलग पास होना अनिवार्य नहीं था; कुल मिलाकर 40% अंक लाना जरूरी था।”
कड़वा सच 2: तकनीकी रिजेक्शन—मशीन आपकी मेधा नहीं, सटीकता देखती है
परीक्षा हॉल का दबाव और ‘एग्जामिनेशन स्ट्रेस’ अक्सर अच्छे-अच्छे मेधावी छात्रों से ऐसी गलतियां करा देता है जिसे कंप्यूटर आधारित ओएमआर (OMR) प्रणाली कभी माफ नहीं करती। एक रणनीतिक चूक आपकी पूरी मेहनत को शून्य कर सकती है। कंप्यूटर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका आईक्यू (IQ) कितना है; उसे केवल सही ढंग से भरे गए गोलों से मतलब है।
ओएमआर रिजेक्शन के 5 ‘साइलेंट किलर्स’:
- रोल नंबर की त्रुटि: अंकों या गोलों में एक भी गलत प्रविष्टि।
- रजिस्ट्रेशन नंबर: इसे भरने में की गई मानवीय चूक।
- ओवरराइटिंग और व्हाइटनर (सबसे घातक): डेटा को काटकर सुधारने की कोशिश करना या व्हाइटनर लगाना। आयोग इसे ‘संदिग्ध प्रविष्टि’ मानकर सीधे बाहर कर देता है।
- क्वेश्चन बुकलेट सीरीज: बुकलेट कोड (A, B, C, D) को गलत भरना या खाली छोड़ना।
- अपूर्ण या गलत बबलिंग: गोलों को आधा भरना या एक ही पंक्ति में दो गोले काला करना।
यहाँ ‘सावधानी’ आपके ‘विषय ज्ञान’ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यदि 110 अंक पाने वाले अभ्यर्थी ने बुकलेट सीरीज भरने में गलती की है, तो उसका पूरा स्कोर व्यर्थ है।
कड़वा सच 3: TGT 2016 का इतिहास—गलतियों की कोई माफी नहीं
इतिहास हमें चेतावनी देता है। TGT 2016 की भर्ती परीक्षा एक ऐसा उदाहरण है जहाँ हजारों नहीं बल्कि लाखों अभ्यर्थी सिर्फ तकनीकी कारणों से दौड़ से बाहर हो गए थे। उस समय कई योग्य उम्मीदवारों ने उच्च अंक प्राप्त किए थे, लेकिन रोल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर में की गई मामूली त्रुटियों के कारण उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने उनकी प्रतियों को जांचने से साफ इनकार कर दिया।
अदालती कार्यवाही के बावजूद, आयोग ने अपने सख्त रुख को बनाए रखा। यह स्पष्ट संदेश है: आयोग के लिए नियम सर्वोपरि हैं, अभ्यर्थी की योग्यता नहीं। इसलिए, परीक्षा के उस एक घंटे में आपका संयम और ओएमआर भरने की सटीकता ही आपकी वास्तविक जीत है।
रिजल्ट स्टेटस: आगामी विषयों के लिए रणनीतिक अपडेट
परिणामों को लेकर उत्सुकता स्वाभाविक है, लेकिन एक गंभीर प्रतियोगी के तौर पर आपको अपनी स्थिति का वास्तविक आकलन करना चाहिए।
- वर्तमान स्थिति: हिंदी और गणित विषयों के परिणाम पहले ही घोषित किए जा चुके हैं।
- प्रतीक्षारत विषय: विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेज़ी, संस्कृत, जीवविज्ञान और भौतिक विज्ञान के परिणाम अंतिम चरण में हैं। आयोग स्तर पर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
- रणनीतिक सलाह: केवल परिणामों की प्रतीक्षा करना आपकी सबसे बड़ी गलती हो सकती है। यदि आप 40% के बेंचमार्क को पार कर रहे हैं, तो यह समय ‘सरकारी नौकरी’ के रियलिटी चेक का है—परिणाम आने के बाद मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए समय बहुत कम बचेगा।
निष्कर्ष: ज्ञान बनाम अनुशासन
UP LT ग्रेड परीक्षा केवल आपकी जानकारी का परीक्षण नहीं है, बल्कि यह एक ‘एलिमिनेशन टेस्ट’ है जहाँ छोटी सी चूक आपकी वर्षों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है। एक सीनियर एनालिस्ट के तौर पर मेरी सलाह यही है कि अगली बार जब आप परीक्षा हॉल में बैठें, तो याद रखें कि ओएमआर का हर गोला आपकी तकदीर लिख रहा है।
अंत में, स्वयं से यह गंभीर प्रश्न पूछें: “क्या आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपकी बरसों की मेहनत पर भारी पड़ने वाली है?” अपनी तैयारी की गति बनाए रखें और मुख्य परीक्षा के लिए स्वयं को अनुशासित करें।

लेखक परिचय – चंद्रशेखर
मैं चंद्र शेखर, एक प्रशिक्षित और समर्पित गणित शिक्षक हूं। मैं MadhyamikPariksha.com का संस्थापक हूं। मेरा उद्देश्य छात्रों को सही, सरल और भरोसेमंद शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराना है।
मेरी शैक्षणिक योग्यता इस प्रकार है:
🎓 M.Sc (गणित)
📘 B.Ed
🔬 B.Sc (PCM)
✅ TGT Qualified (Maths) – 2016
📝 UP TET Qualified
मुझे गणित पढ़ाने का 7 वर्षों का अनुभव है। मैंने हजारों छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मार्गदर्शन दिया है। मेरी खासियत है – गणित को आसान भाषा और रोचक तरीके से समझाना।
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चंद्रशेखर
(M.Sc Maths, B. Sc, B.Ed, TGT Qualified 2016, UPTET Qualified)